बीवी , बंता सेः चुपचाप खा रहे हो , कुछ तो बोलो। कम से कम मेरे पुलाव की हीतारीफ कर दो।
बंता : एक शर्त पर करूंगा।
बीवीः क्या ?
बंता : वादा करो की दोबारा ऐसा पुलाव कभी नहीं बनाओगी !!!
फिर बजा फोन
संता , बंता सेः तुम्हारे दोनों कानों पर पट्टी क्यों बंधी है ?
बंताः क्या बताऊं यार कल जब में प्रेस कर रहा था , तभी मेरे फोन की घंटी बजी और मैंने जल्दबाजी में गर्म प्रेस कान में लगा ली।
संताः ओह , लेकिन तुम्हारे दूसरे कान में भी पट्टी क्यों बंधी है ?
बंताः अरे यार दो मिनट बाद फिर फोन आया था !!!
बंताः क्या बताऊं यार कल जब में प्रेस कर रहा था , तभी मेरे फोन की घंटी बजी और मैंने जल्दबाजी में गर्म प्रेस कान में लगा ली।
संताः ओह , लेकिन तुम्हारे दूसरे कान में भी पट्टी क्यों बंधी है ?
बंताः अरे यार दो मिनट बाद फिर फोन आया था !!!
तेरी याद आवै है
शाम - सबेरे तेरी घणी याद आवै है। सारी रात मन्नै जगावै है।
करने को तो करूं तन्नै कॉल।
... पर कस्टमर केयर की छोरी हर बार बैलंस लो बतावै है।
करने को तो करूं तन्नै कॉल।
... पर कस्टमर केयर की छोरी हर बार बैलंस लो बतावै है।
कंडक्टर की शादी
कंडक्टर की शादी हो रही थी। जब दुल्हन फेरों के वक्त उसके पास आकर बैठी , तो वह बोला , ' थोड़ा और पास आकर बैठ। एक सवारी और बैठ सकती है !!!'
लड़की पट जाए तो...
लड़की अगर अपनी मर्जी से पट जाए तो ' प्यार ' । अगर दोस्त पटवाए तो ' उपहार' ।
घरवाले ला दें तो ' संस्कार ' । और अगर खुद पटा के लाओ तो ' हाहाकार '
घरवाले ला दें तो ' संस्कार ' । और अगर खुद पटा के लाओ तो ' हाहाकार '
मच्छर चालीसा
जय मच्छर बलवान उजागर, जय अगणित रोगों के सागर ।
नगर दूत अतुलित बलधामा, तुमको जीत न पाए रामा ।
गुप्त रूप घर तुम आ जाते, भीम रूप घर तुम खा जाते ।
मधुर मधुर खुजलाहट लाते, सबकी देह लाल कर जाते ।
वैद्य हकीम के तुम रखवाले, हर घर में हो रहने वाले ।
हो मलेरिया के तुम दाता, तुम खटमल के छोटे भ्राता ।
नाम तुम्हारे बाजे डंका ,तुमको नहीं काल की शंका ।
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारा, हर घर में हो परचम तुम्हारा ।
सभी जगह तुम आदर पाते, बिना इजाजत के घुस जाते ।
कोई जगह न ऐसी छोड़ी, जहां न रिश्तेदारी जोड़ी ।
जनता तुम्हे खूब पहचाने, नगर पालिका लोहा माने ।
डरकर तुमको यह वर दीना, जब तक जी चाहे सो जीना ।
भेदभाव तुमको नही भावें, प्रेम तुम्हारा सब कोई पावे ।
रूप कुरूप न तुमने जाना, छोटा बडा न तुमने माना ।
खावन-पढन न सोवन देते, दुख देते सब सुख हर लेते ।
भिन्न भिन्न जब राग सुनाते, ढोलक पेटी तक शर्माते
नगर दूत अतुलित बलधामा, तुमको जीत न पाए रामा ।
गुप्त रूप घर तुम आ जाते, भीम रूप घर तुम खा जाते ।
मधुर मधुर खुजलाहट लाते, सबकी देह लाल कर जाते ।
वैद्य हकीम के तुम रखवाले, हर घर में हो रहने वाले ।
हो मलेरिया के तुम दाता, तुम खटमल के छोटे भ्राता ।
नाम तुम्हारे बाजे डंका ,तुमको नहीं काल की शंका ।
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारा, हर घर में हो परचम तुम्हारा ।
सभी जगह तुम आदर पाते, बिना इजाजत के घुस जाते ।
कोई जगह न ऐसी छोड़ी, जहां न रिश्तेदारी जोड़ी ।
जनता तुम्हे खूब पहचाने, नगर पालिका लोहा माने ।
डरकर तुमको यह वर दीना, जब तक जी चाहे सो जीना ।
भेदभाव तुमको नही भावें, प्रेम तुम्हारा सब कोई पावे ।
रूप कुरूप न तुमने जाना, छोटा बडा न तुमने माना ।
खावन-पढन न सोवन देते, दुख देते सब सुख हर लेते ।
भिन्न भिन्न जब राग सुनाते, ढोलक पेटी तक शर्माते
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