Only Married Men will Understand This..

Husband: Aaj khane mein kya banaogi??
Wife: Jo aap kaho.


H: Dal chawal bana lo?
W: Abhi kal hi to khaye the.


H: To sabji roti bana lo.
W: Bacche nahi khayenge.


H: To chhole puri bana lo.
W: Mujhe heavy heavy lagta hai.


H: Eggs bhurji bana lo.
W: Aaj guruvaar hai?


H: Paraanthe ?
W: Raat ko paraanthe kaun khata hai?


H: Hotel se mangwa lete hain??
W: Roz roz hotel ka nahi khana chahiye.


H: Kadhi chawal?
W: Dahi nahi hai.


H: Idli sambar?
W: Usme time lagega. Pehle bolna chahiye tha na?


H: Maggie hi bana lo, usme time nahi lagega.
W: Woh koi meal thodi hai? Pet nahi bharta.


H: Phir ab kya banaogi?
W: Jo aap kaho.

funny sms...

Girls before marriage
look like barbie Doll,

After marriage
beautiful doll

After 1yr
Nice Doll

After 2yr
only Doll

After 5yr
dhol

After 10yr
Dolly Bindra...
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Wo Bevafa hai to kya hua mat bura kaho usko,
Wo Bevafa hai to kya hua mat bura kho usko
tum kisi or ko pta lo dfa kro usko...

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सोच...

भाग्यवादी लोग,
कुछ होने का इंतज़ार करते हैं,
कर्मयोगी,
हर हाल में कुछ कर दिखातें हैं|

भाग्यवादी कहतें हैं की
समय से पहले,भाग्य से ज्यादा
कुछ नहीं मिलता,
कर्मयोगी हर युग में अपना
भविष्य खुद लिखतें हैं
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सच कह दूँ ऐ उपरवाले !
गर तू बुरा न माने |
तेरे मंदिर के बुत हो गये पुराने |
अपनों से बैर रखना
तुने बुतों से सीखा |
युद्ध सीखाया काजी-मुल्ला को भी खुदा ने |
तंग आ के मैंने आखिर मंदिर-मस्जिद छोड़ा|
काजी का उपदेश छोड़ा,छोड़े तेरे फसाने|
पत्थर की मूरतों में समझा है तू खुदा है|
खाके-वतन का मुझको हर जर्रा देवता है|
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विवेक ,संयम,चित्शुदी
और पुरुषार्थ
इन मुख्य साधनों द्वारा
अपना और समाज का
कल्याण साधकर
मानवता की परमसिद्दी
प्राप्त करना ही
मानव जीवन का ध्येय है||
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शायरी...

हम निकले थे सैर करने
दिल में कुछ अरमान थे,
एक तरफ हरियाली थी
एक तरफ शमशान थे|
यूँ ही हम आगे बड़े
उस दबी ह्डी के कुछ बयाँ थे,
ओह!चलते मुसाफिर
जरा संभल कर चल
हम भी कभी इंसान थे
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हमें अपनों ने लूटा
गैरों में कहाँ दम था,
मेरी कश्ती वहाँ डूबी
जहाँ पानी भी कम था|
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हम हैं दरिया
हमें अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ निकल जायेंगे
वहीं रास्ता बना लेंगे
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हैं अँधेरे बहुत तुम सितारे बनो,
डूबतों के लिए तुम किनारे बनो,
इस जमाने में हैं बेसहारा बहुत,
तुम सहारे न लो,बस सहारा बनो|
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हजारों मंजिलें होंगी,
हजारों कारवाँ होंगे,
निगाहें हमको ढुदेंगी
न जाने हम कहाँ होंगे|
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हकीकत छुप नही सकती
बनावट के उसूलों से,
खुशबू आ नही सकती
कभी कागज के फूलों से|
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हो सके तो अपनी खुशियाँ
दर्द के मारों में बाँट दो,
वर्ना जिंदगी का यह कारवाँ
यूँ ही गुजर जायेगा|
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हो मेरे दम से यूँ ही
मेरे वतन की इज्ज़त,
जिस तरह फूल से होती है
चमन की इज्ज़त|
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संता बनता डोट कोम


"संता मास्टर जी-तुम लेट क्यों हुए?
बंता-एक आदमी का नोट गुम हो गया था
संता-तो तुम क्या ढुंढने में मदद कर रहे थे|
बंता-नहीं मैं तो उसके जाने का इंतज़ार कर रहा था|
संता -क्यों ?
बंता-क्यूंकि नोट मेरे पैर के नीचे दबा था|"



"संता और बंता पड़ोसी थे और दोनों की बिलकुल नही जमती थी
संता रोज़ भगवान् से प्रार्थना किया करता था
एक दिन उसकी भक्ति से खुश हो कर भगवान् प्रकट हुए
और बोले
तुम जो मांगोगे तुम्हे वो सब मिलेगा
लेकिन उस से दुगना तुम्हारा पड़ोसी बंता को मिलेगा
मांगो क्या मांगते हो?
संता मैं थोड़ी देर सोचा ,फिर बोला
भगवान्,मुझे अधमरा कर दो..."